बाबा का घर
Hindi Poem : बाबा का घर छोड़ना आसान तो नही होता।
बाबा का घर छोड़ना आसान तो नही होता।
कितनी यादें समेटे,
जितनी समेटुं उतनी कम है,
अपना घर बनाने जा रही हूँ,
बाबा का आंगन छोड़ कर,
जो सिखाया बाबा ने,
उसे जमीं पर उतार पाऊँगी क्या?
बाबा की याद, माँ का प्यार,
भाई की लडाई..
सभी को सहेज ले जा रही हूँ,
बांध के लाल रंग जोड़े मे,
बनाने को एक नई दुनिया,
एक बंधन नया सवारने..
क्यों जाना है?
ये सवाल कर भी लू..
पर एक अंश मेरा भी,
शामिल करने की साजिश है।
सफर कांट तो लू अकेले,
पर एक ख्याल जुड़ ही जाय,
तो क्या गलत है भला?
-रित्ती



Ek hi khyaal kyo, jitne khyaal jud sakte hai Utne judne chahiye na.