तुम्हारा होना एक इत्तेफ़ाक़ तो नहीं,
कविता- ख्याली सी, इत्तेफाक सी
तुम हो,
ये सिर्फ एक अहसास नहीं है,
ये बर्फ सा बहता पानी है,
चट्टानों को चीरता हुआ वाहन है,
दिल में आता हुआ एक ख़्वाब है।
तुम हो,
ये सिर्फ कहने के बात तो नहीं,
ये एक सवाल नहीं, जवाब है,
ना यकीन हो, तो हवाओं से पूछना,
जो रोज तुम्हे छू कर गुजरती है।
तुम हो,
तुम्हारा होना एक इत्तेफ़ाक़ तो नहीं,
इत्तेफ़ाक़ टकराते तो जरूर है,
पर मिलते नहीं है, मिलते वो है,
जो टकराकर, रुकरार, हम-तुम सी बाते करते है।
-रित्ती



Such a beautiful poem and beautiful narration<33
Loved it so much<33
This is so beautifully written and narrated diii..🤌