आसमान से वार्ता और उसका इंतजार ...
एक शर्त या सोदा...
वो दूरी कुछ इस तरह नाप रहा है
मेरे अंतरमं मे जैसे तेज आ रहा है
उसकी बाते सुन हैरान रहती जरूर हूँ
पर उसके ख्याल पर सवाल नही आता
क्या है, कोन है वो मेरा?
आसमां मुझसे पूछता है हर सुबह,
क्युको रातको वो भी भूल जाता,
सितारों की तलाश मे!
सितारे जो खो गए थे,
वो सिमट कर बैठे है अंधेरी ओढ़नी मे,
और तुम कितना जतन करते हो,
ये दिखाते है हर कालि रात मे,
जहा सितारा अब भी दूर है,
आसमां फिर भी बेचैन है,
जेसे शिव गौरी के लिये थे!
समर्पण, धर्ये शायद इलाज हो?
आसमां का
और हमारे नाकाम सवालों का भी...
तो फिर आसमां से हमारा सौदा हुआ!
उसको रंगिनियत हमारी,
हमारी कविता उनकी,
जो पाया अपनी आरज़ू को,
वो पाए सारा संसार,
जो खोये उसका दीदार,
तो खोये अपना वजूद भी...
शर्त सौदा जो कहो,
हम दोनों घबराये थे,
खोने का ख्याल दोनों मे,
घुन्जता खामोश था।
हम परे ना हटे ,
चाहे लो ये आसमां या शब्दो की चाल…
शिव का तप अपनाएंगे,
लीन रहेंगे बस उसमे,
फिर त्यागना क्यों ना पड़े ये संसार सारा,
मन मे चाह,
आँखों मे तेज,
पंछियो मे शोर,
दिल मे धेर्ये,
समय का चक्कर लिए,
आसमां ने आशा बांधी,
कविता ने तुकबंदी थामी,
और इंतज़ार का कटोरा लिए,
बैठे गए कर्म मायाजाल मे।
-Ritti



Bahut sundar rachna hai!! just a polite query- घुन्जता खामोश था।, I could not understand what does it mean? google baba bhi fail ho gye!!
Bohot khubsurat likha hai di 🤌🏻✨🫶🏻🥹